धारा 251-ए/ 251-A

खातेदारी भूमि मे मेसे रास्ता लेने के प्रावधान

राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 251-ए के तहत निजी खातेदारी भूमि में से काश्तकारों को रास्ता उपलब्ध करवाने संबंधी प्रावधान किए गये है।

  • निजी खातेदारी भूमि में से काश्तकारों को रास्ता उपलब्ध करवाने हेतु सक्षम प्राधिकारी उपखण्ड अधिकारी है।
  • उपखण्ड अधिकारी को धारा 251-ए के तहत दर्ज प्रकरणों का निस्तारण आवश्यक रूप से 90 दिवस मे करना होता है।
       रास्ता या पहुँच मार्ग एक आवश्यक सुखाधिकार है। किसी भी भूमि चाहे वह कृषि भूमि हो अथवा अकृषि भूमि हो पर पहुंच हेतु रास्ता होना आवश्यक होता है। कृषि भूमि पर पहुंच मार्ग की समस्या के समाधान हेतु राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 में संशोधन किया जाकर धारा 251 भी जोड़ी गई है तथा राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर परिपत्र भी जारी किये गये है।

राज्य सरकार द्वारा समय समय पर जारी किये गये दिशा निर्देशों के उपरांत भी रास्ते समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है अतः राज्य सरकार के निर्देशानुसार पूर्व में जारी समस्त परिपत्रों की निरन्तरता में निम्नलिखित दिशा निर्देश जारी किये गये है।

1. राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1956 की धारा 251 के प्रावधानों के अन्तर्गत खातेदार द्वारा अन्य खातेदारो की जोत में से नया मार्ग बनाने या पुराने मार्ग को विस्तारित करने का आवेदन उपखण्ड अधिकारी को करने का प्रावधान है तदनुसार उपखण्ड अधिकारी द्वारा नवीन मार्ग घोषित घोषित किया जा सकता है, या पूर्व में उपलब्ध रास्ते को 30 फीट की सीमा तक चौड़ा किया जा सकता है। इस प्रकार घोषित मार्ग को राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक रास्ता दर्ज किया जाये। इस संबंध में अलग नम्बर दिया जाकर इसका क्षेत्रफल भी अंकित किया जाये। रास्ते की भूमि को खातेदार की खातेदारी से कम किया जाकर उतनी भूमि राजकीय खाते में दर्ज की जाये।

2. जहां रास्ता राजस्व अभिलेख में दर्ज नहीं है तथा कृषक द्वारा परम्परागत रूप से सुखाधिकार के रूप में जिस मार्ग का उपयोग किया जा रहा है उस मार्ग को अवरूद्ध करने का प्रकरण प्राप्त होने पर उसे धारा 251 राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के अन्तर्गत सक्षम अधिकारी द्वारा विधिक प्रक्रिया अपनाकर खुलवाया जाये। इस प्रकार रास्ता खुलवाया जाने हेतु संबंधित सक्षम अधिकारी द्वारा लिखित एवं कारण सहित आदेश (speaking order) पारित किया जावे। आदेश में रास्ते में अवरोध करने वाले व्यक्ति को भविष्य में अवरोध उत्पन्न नही करने के लिये भी पाबंद किया जाये। इस प्रकार के प्रकरणों में ना तो रास्ता राजस्व अभिलेख में दर्ज किया जावेगा और ना ही संबधित खातेदार / खातेदारो का खातेदारी क्षेत्रफल कम किया जावेगा।

3. जहां पर रास्ता राजस्व अभिलेख में दर्ज नही है परन्तु मौके पर रास्ता स्थाई रूप से चल रहा है. वहां पर राजकीय भूमि (सिवायचक / गैर मुमकीन भूमि) में से गुजर रहे रास्ते को स्थाई किया जाकर गैर मुमकीन रास्ता दर्ज किया जाये। सिवायचक गैर मुमकीन भूमि को रास्ता दर्ज करने हेतु प्रकरण जिला कलक्टर को प्रेषित कर उनसे आदेश प्राप्त कर रिकार्ड में आवश्यक संशोधन किया जाये। इस प्रकार के रास्ते को नक्शों में चिन्हित कर अलग खसरा नम्बर भी दिया जाये।

4. जहां पर स्थाई रास्ता किसी खातेदार/खातेदारों की भूसे गुजर रहा है. मौके पर विभिन्न सरकारी योजनाओं यथा महात्मा गांधी नरेगा, सार्वजनिक निर्माण विभाग, कृि विपणन बोर्ड द्वारा खातेदारी भूमि से सहमति से सड़कों का निर्माण भी कर दिया है उन प्रकरणो में निम्न प्रकार प्रक्रिया अपनाई जाये:-

1. जिन प्रकरणों में / खातेदारों द्वारा उनकी खातेदारी में गुजर रहे रास्ते की भूमि को राजहित में सार्वजनिक सडक निर्माण / सार्वजनिक रास्ते हेतु सहमति से समर्पित कर दिया है, यहां रास्ता सरकारी दर्ज कर अलग क्षेत्रफल खातेदारी से कर दिया जाये। रास्ते को नक्शे में दिखाया जाकर उसे अलग नम्बर भी दिया जाये। 2. जहां खातेदार द्वारा रास्ते के उपयोग में आ रही भूमि को राजहित में समर्पण करने से मना कर दिया जाये उस प्रकरण में रास्ते में काम में आ रही भूमि को गैर मुमकीन

रास्ता दर्ज किया जाये परन्तु उसे काश्तकार की खातेदारी में ही रहने दिया जाये। 3. कुछ प्रकरणों में वर्तमान भू प्रबंध से पहले रास्ता अभिलेख में दर्ज था, परन्तु वर्तमान में रास्ता दर्ज नहीं है, ऐसे प्रकरणों में राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 136 के अन्तर्गत विधिक कार्यवाही कर अभिलेख को ठीक किया जावे। इस संबंध में कोई भी आदेश पारित करने से पहले सम्बंधित पक्षकार को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर अवश्य प्रदान किया जाये।

5. कई प्रकरणों में काश्तकार के खेत तक पहुंच मार्ग राजकीय सिवायचक भूमि में से होकर गुजरता हैं इस प्रकार के प्रकरणों  के प्रावधान अनुसार यदि कोई खातेदार अपनी जोत तक पहुंचने के लिये राजकीय भूमि में से होकर नया मार्ग बनाना चाहता है या किसी विद्यमान मार्ग को विस्तारित यो चौड़ा करना चाहता है तो ऐसे खातेदार द्वारा ऐसी सुविधा के लिए आवेदन करने पर उपखण्ड अधिकारी द्वारा जांच करने पर यदि यह समाधान हो जाये कि मार्ग की आवश्यकता है एवं खातेदार को उसकी जोत तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधन का अभाव है उक्त स्थिति में राजस्थान स्टाम्प नियम 2004 के नियम 2 के उप नियम 1 के खण्ड (ख) के तहत गठित जिला स्तरीय समिति द्वार सिफारिश की गई कृषि भूमि दरों को दुगना प्रतिकर लिया जाकर रास्ता प्रदत किया जाये यह नया मार्ग लघुतम या निकटतम रूट से होगा तथा 30 फिट से अधिक चौड़ा नहीं होगा रास्ते के लिए प्रदत की गई भूमि राजस्व अभिलेखों में रास्ते के रूप में अधिलिखित की जायेगी एवं उक्त भूमि का उपयोग सार्वजनिक होगा।

6. कई बार सह खातेदारों द्वारा अपनी जोतो के विभाजन के समय अपनी जोतो तक पहुंचने के लिए कुछ भूमि रास्ते के रूप में छोड़ी जाती है। इस प्रकार की भूमि को रास्ते के रूप में नक्शे में दिखाने के साथ साथ राजस्व रिकार्ड में भी उसे अलग नम्बर दिया जाकर उसका क्षेत्रफल अंकित करते हुए राजस्व अभिलेख में रास्ता दर्ज किया जाये। यदि यह रास्ते आगे किसी सार्वजनिक रास्ते पर खुलता / मिलता हो तो ऐसे रास्ते को भी सार्वजनिक रास्ते के रूप में अभिलेख में दर्ज किया जाना चाहिए। यदि यह रास्ता केवल सह खातेदारों के जोतो तक ही सीमित हो तो उस रास्ते को सभी सह खातेदारों के नाम दर्ज किया जाना चाहिए। सम्बन्धित अधिकारी द्वारा विभाजन करने से पूर्व प्रत्येक सम्बन्धित काश्तकार के लिए रास्ते का प्रावधान रखे जाने के निर्देश है। 

7. रास्तो के अतिरिक्त खेतो में सिचाई हेतु पानी से जाने के लिए भूमिगत पाईप लाईन की समस्या के समाधान हेतु धारा 251क में स्पष्ट व्यवस्था दी गई है। भूमिगत पाईप लाईन के लिए निर्धारित मुआवजा जिला स्तरीय कमेटी द्वारा निर्धारित दर का 10 प्रतिशत होगा।
जिस भूमि में से होकर भूमिगत पाईप लाईन डाली जायेगी, यह खातेदार की खातेदारी में बना रहेगा, खातेदार उसमें खेती कर सकेगा। खातेदार उस भूमि पर स्थाई निर्माण नही कर सकेगा। 

8. जहां रास्ता खातेदार कृषक के खेत / खातेदारी भूमि से निकलता है एवं कृषक द्वारा निरन्तर उपयोग किया जा रहा है किन्तु उसकी तरमीम राजस्व नक्शे से भिन्न मौके पर अन्य जगह है तो ऐसी स्थिति में मौके व राजस्व अभिलेख की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुये जनहित में शिविर प्रभारी गुणावगुण के आधार पर विनिश्चय कर राजस्व अभिलेख में दुरुस्ती कर तरमीम कर सकेगा।


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