राजस्थान में अनुसूचित जाति/जनजाति की खातेदारी भूमियों पर अवैध कब्जे के विरूद्ध कार्यवाही (183 बी)
राजस्थान में अनुसूचित जाति/जनजाति की खातेदारी भूमियों पर अवैध कब्जे के विरूद्ध कार्यवाही (183 बी)
राजस्थान में अनुसूचित जाति/जनजाति की खातेदारी भूमियों पर अवैध कब्जे के विरूद्ध कार्यवाही करने के राजस्थान काष्तकारी अधिनियम 1955 में व्यापक प्रावधान है। राजस्थान में अनुसूचित जाति/ जनजाति की खातेदारी की कृषि भूमि पर प्रभावषाली लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जे किये हुए है, तो राजस्थान काष्ताकारी अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत गैर कानूनी है।
साथ ही अनुसूचित जाति व जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 3(1)(एफ)(जी) के तहत यह आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आकर दण्डनीय है।
राजस्थान काष्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 183-बी तथा 183-सी में अनुसूचित जाति/ जनजाति के व्यक्तियों की भूमि पर अन्य जातियों के व्यक्तियों द्वारा अवैधानिक रूप से कब्जा किये जाने पर त्वरित बेदखली एवं दण्डात्मक कार्यवाही किये जाने का प्रावधान है। उक्त अधिनियम की धारा 183-सी में अतिक्रमि को 15 दिन के उपरांत उसके द्वारा दोष सिद्ध होने पर न्यूनतम एक माह तथा अधिकतम 3 वर्ष का साधारण कारावास तथा अधिकतम रूप्ये 20,000/- का जुर्माना किया जा सकता है।
प्रभावित व्यक्ति अपने क्षेत्र के तहसीलदार के समक्ष उक्त भूमि को खाली करवाने हेतु आवेदन करना होगा।
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